असम विधानसभा चुनाव से पहले अब सियासत और ज्यादा गरम होने वाली है, क्योंकि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जल्द ही असम के दौरे पर आने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को असम आएंगे और इस दौरान वे AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। बताया जा रहा है कि अपने इस दौरे में ओवैसी कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे, खासकर उन इलाकों में जहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। माना जा रहा है कि ओवैसी का यह दौरा चुनाव से पहले वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है और कई सीटों पर मुकाबला और दिलचस्प बना सकता है। अब देखना होगा कि ओवैसी की एंट्री से असम चुनाव की राजनीति किस दिशा में जाती है।

असम विधानसभा चुनाव से पहले अब राज्य की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प होती जा रही है, क्योंकि अब असदुद्दीन ओवैसी भी असम की चुनावी लड़ाई में एंट्री करने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को असम के दौरे पर आएंगे और इस दौरान वे AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। बताया जा रहा है कि अपने दो दिन के दौरे में ओवैसी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम 8 जनसभाओं को संबोधित करेंगे और खास तौर पर बिन्नाकांडी सीट पर बदरुद्दीन अजमल के समर्थन में प्रचार करेंगे, जहां से अजमल इस बार चुनाव लड़ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओवैसी का यह दौरा सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। माना जा रहा है कि इस दौरे का मुख्य लक्ष्य अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करना है, खासकर उन सीटों पर जहां AIUDF पहले से मजबूत मानी जाती है। ओवैसी अपने भाषणों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साध सकते हैं और AIUDF को एक मजबूत क्षेत्रीय पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश करेंगे। इससे कई सीटों पर चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
बताया जा रहा है कि ओवैसी का असम दौरा दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद फाइनल हुआ, जिसमें बदरुद्दीन अजमल के बेटे अब्दुल रहमान अजमल ने उनसे मुलाकात की थी और चुनाव को लेकर चर्चा हुई थी।

अब ओवैसी के असम आने से साफ है कि AIUDF चुनाव में पूरी ताकत झोंकना चाहती है और चुनावी लड़ाई को और तेज करना चाहती है। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि ओवैसी की सभाओं का चुनाव पर कितना असर पड़ता है और क्या इससे असम की कुछ सीटों पर चुनावी गणित बदलता है या नहीं।