असम की सियासत से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट ने साफ कर दिया है कि पार्टी किस रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर जालुकबाड़ी से चुनाव लड़ेंगे, जबकि कई बड़े नेताओं को उनकी मजबूत सीटों से ही मौका दिया गया है। सवाल ये है कि क्या BJP की यह रणनीति उसे फिर से सत्ता दिला पाएगी?

असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासत अब पूरी तरह गरमा चुकी है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। इस बार भाजपा कुल 88 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसके सहयोगी दलों को भी जगह दी गई है। असम गण परिषद को 26 सीटें और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट को 11 सीटें दी गई हैं, जिससे साफ है कि पार्टी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतर रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट जालुकबाड़ी से ही चुनाव लड़ेंगे, जहां उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए नेताओं को भी पार्टी ने मौका दिया है। भूपेन बोरा को बिहपुरिया और प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर सीट से टिकट दिया गया है, जो इस चुनाव में खास नजर रखे जाने वाले नाम होंगे।
इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं पर भी पार्टी ने भरोसा जताया है। पिजूष हजारिका को जागीरोड, बिमल बोरा को तिनखोंग, भावेश कलिता को रंगिया, अशोक सिंघल को ढेकियाजुली, रनोज पेगू को धेमाजी, अजंता नेओग को गोलाघाट, कृष्णेंदु पॉल को पाथारकांडी, रंजीत कुमार दास को भवानीपुर-सोरभोग और जयंत मल्ला बरुआ को नलबाड़ी से टिकट दिया गया है।
इस सूची से साफ है कि भाजपा ने ज्यादातर उन्हीं चेहरों पर भरोसा जताया है, जिनकी अपने-अपने इलाकों में मजबूत पकड़ है और जो जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब इस लिस्ट के सामने आने के बाद असम में चुनावी माहौल और तेज हो गया है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाकी पार्टियां किस तरह अपनी रणनीति तय करती हैं और मुकाबला कितना कड़ा होता है।


