आज असम में उरूका का त्योहार मनाया जा रहा है, जो माघ बीहु की शुरुआत का प्रतीक है। लेकिन इस साल इस खुशी में थोड़ी उदासी भी है। असमवासियों के प्रिय गायक ज़ुबिन गर्ग के बिना यह उत्सव कुछ अधूरा सा लग रहा है। उनकी कमी हर घर और हर समारोह में महसूस की जा रही है। हर घर में पारंपरिक पिठा और मिठाइयाँ बनाई जा रही हैं, लोग बाजारों में खरीदारी कर रहे हैं, आज उरूका की खुशियों के बीच, असमवासियों के दिलों में ज़ुबिन गर्ग की याद ने थोड़ी उदासी छोड़ दी है। चलिए जानते हैं, इस साल असम में उरूका और माघ बीहु कैसे मनाया जा रहा है और क्या खास तैयारी की गई है।

आज उरूका का दिन है, जो माघ बीहु की शुरुआत का प्रतीक है। यह असम में खुशियों, मिलजुल कर खाने और परिवार और गाँव के लोगों के साथ त्योहार मनाने का समय होता है। उरूका की रात में हर घर में खाना पकता है, आग जलती है और लोग गीत गाते हुए, नाचते हुए त्योहार का आनंद लेते हैं।
लेकिन इस साल इस खुशी के साथ थोड़ी उदासी भी है। असमवासी अपने प्रिय गायक ज़ुबिन गर्ग को खोने का दुख महसूस कर रहे हैं। उनकी कमी हर घर और हर समारोह में महसूस की जा रही है। लोग कह रहे हैं कि भले ही ज़ुबिन हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत हर बीहु में उनकी याद दिलाते हैं और उनकी आत्मा को जीवित रखते हैं।
हर घर में इस अवसर पर पारंपरिक पिठा और मिठाई बनाई जा रही है। सबसे पसंदीदा पिठा हैं नारियल पिठा, जिसमें कद्दूकस किया हुआ नारियल और गुड़ भरा जाता है, और तिल पिठा, जिसमें काले तिल और गुड़ भरा जाता है। लोग कई दिन से चावल पीस रहे हैं, तिल भून रहे हैं, नारियल कद्दूकस कर रहे हैं और पिठा बना रहे हैं, ताकि त्योहार का स्वाद हर घर में बना रहे।

उरूका और माघ बीहु का अहम हिस्सा है मेजी और भेला घर बनाना। उरूका की रात में आग जलती है और लोग उसके चारों ओर बैठकर गीत गाते, नाचते और ठंडी हवा में आग की गर्मी महसूस करते हैं। अगली सुबह, स्नान करने के बाद लोग मेजी को जलाते हैं। मेजी घास, बांस और सूखी लकड़ियों से बना होता है। मेजी जलाते समय प्रार्थना की जाती है और आग की गर्मी ठंडी सुबह में उत्सव की खुशियों को बढ़ा देती है।
माघ बीहु बिना पकवानों के अधूरी है। इस अवसर पर बनाए जाते हैं चिला पिठा, तिल के लड्डू, नारियल के लड्डू, गाखीर पिठा, तेल पिठा, चूंगा पिठा (खाली बांस में) और टेकली पिठा। इसके अलावा दही-सिरा और कूमल साउल भी बहुत पसंद किए जाते हैं।
इस समय बाजारों में भी बहुत हलचल है। मछली की मांग हर साल की तरह इस साल भी ज्यादा है। लोग मछली खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ रहे हैं और इसकी कीमतें भी बढ़ी हुई हैं।