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असम की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। अखिल असम आदिवासी संघ (AATS) ने राज्य के सभी आदिवासी समुदायों से अपील की है कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के असम प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया का पूर्ण बहिष्कार करें।

AATS का आरोप है कि दिलीप सैकिया ने 2 अगस्त को दिए एक बयान में संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी लोगों के अधिकारों को कमजोर करने वाला रुख अपनाया। उन्होंने कहा था कि छठी अनुसूची के स्वायत्त क्षेत्रों और राज्य के आदिवासी बेल्ट व ब्लॉक में, यदि जरूरत पड़ी तो, कानून में बदलाव करके गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ जैसे अन्य हिस्सों के लोग भी इन इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे।

सैकिया ने यह भी कहा था कि इस स्थिति में छठी अनुसूची के नियम और असम भूमि एवं राजस्व विनियमन के अध्याय 10 के कानून लागू नहीं होंगे। इसका अर्थ है कि यदि उनका प्रस्ताव लागू हो जाता है तो बाहरी लोग भी आदिवासी क्षेत्रों में भूमि खरीद पाएंगे।

AATS ने इस बयान को “आदिवासी विरोधी” और “पक्षपाती” करार दिया है। संगठन का कहना है कि यह कदम संविधान में आदिवासियों को दी गई सुरक्षा को सीधे खतरे में डालता है और कर्बी आंगलोंग, दीमा हसाओ, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल और अन्य आदिवासी क्षेत्रों के लोगों की भूमि और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर असर डाल सकता है।

संगठन ने मांग की है कि दिलीप सैकिया तुरंत अपना बयान वापस लें और सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दें कि मौजूदा सुरक्षा प्रावधानों में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। AATS ने चेतावनी दी है कि जब तक यह आश्वासन नहीं दिया जाता, उनका बहिष्कार जारी रहेगा।

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