असम की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के असम दौरे के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी सरकार के खिलाफ 20 बिंदुओं वाली चार्जशीट जारी कर दी गई है। सिंडिकेट सिस्टम से लेकर बुलडोजर कार्रवाई, बाढ़ संकट से लेकर रोजगार तक— कई गंभीर आरोप एक साथ सामने रखे गए हैं। क्या ये आरोप चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल देंगे? और इन सवालों का जवाब सरकार कैसे देगी?

असम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा दो दिन के अहम दौरे पर असम पहुंची हैं। उनका यह दौरा सीधे तौर पर आने वाले विधानसभा चुनाव से जुड़ा माना जा रहा है।
दौरे के दौरान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा सरकार के खिलाफ 20 बिंदुओं की चार्जशीट जारी की। यह चार्जशीट सांसद प्रद्युत बोरदोलोई की अगुवाई में तैयार की गई है। कांग्रेस का दावा है कि यह दस्तावेज राज्यभर के लोगों से बातचीत के बाद तैयार हुआ है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्होंने अलग-अलग समाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग, बुद्धिजीवियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से बात कर उनकी शिकायतों को इसमें शामिल किया है।
चार्जशीट में सबसे बड़ा आरोप “सिंडिकेट सिस्टम” को लेकर लगाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि डिसपुर से अवैध रैट-होल माइनिंग, ड्रग्स और दूसरे अवैध कामों को बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा चेकपोस्ट पर सामान के आने-जाने पर कमीशन वसूली का भी आरोप लगाया गया है। लकड़ी, रेत, पत्थर और कोयले जैसे सामान के ट्रांसपोर्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया गया है।
कांग्रेस ने यह भी कहा है कि चाय बागान मजदूरों को 351 रुपये रोज की मजदूरी देने का वादा पूरा नहीं हुआ। असम समझौते की धारा 6 लागू न होने, NRC प्रक्रिया के रुकने और उसके खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बाढ़ और कटाव की पुरानी समस्या पर भी सरकार को घेरा गया है। पार्टी का कहना है कि हर साल बाढ़ से लोग परेशान होते हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे भी उठाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी स्कूल और अस्पतालों की हालत कमजोर हुई है और युवाओं के लिए बड़े स्तर पर नई नौकरियां नहीं आईं। कांग्रेस ने बुलडोजर स्टाइल बेदखली अभियान को लेकर भी सरकार पर सीधा हमला बोला है। आरोप है कि गरीब लोगों को निशाना बनाकर उनके घरों पर बुलडोजर चलाया गया। इसके साथ ही हर साल आने वाली बाढ़ और कटाव के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा गया है। कांग्रेस का कहना है कि बार-बार बाढ़ से तबाही होती है, लेकिन असम को राष्ट्रीय आपदा का दर्जा दिलाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए कुल मिलाकर प्रियंका गांधी का यह दौरा और चार्जशीट साफ दिखा रहा है कि असम में चुनावी माहौल अब और गरम होने वाला है। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।