असम के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। ब्रह्मपुत्र नदी पर अब देश के पहले रिवर लाइटहाउस बनाए जाएंगे। गुवाहाटी के लचित घाट पर केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने इस खास परियोजना की आधारशिला रखी है। पांडु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट में बनने वाले ये लाइटहाउस नदी में चलने वाले जहाजों और नावों को सुरक्षित रास्ता दिखाएंगे, खासकर रात के समय। इतना ही नहीं, इन जगहों को पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यानी यह प्रोजेक्ट असम में नदी परिवहन, व्यापार और पर्यटन—तीनों को नई ताकत देने वाला माना जा रहा है।

असम के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। अब ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के पहले रिवर लाइटहाउस बनाए जाएंगे। गुवाहाटी के लचित घाट पर केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला रखी। यह पहली बार होगा जब भारत में समुद्र की तरह किसी नदी पर भी लाइटहाउस बनाए जाएंगे, जिससे नदी में चलने वाले जहाजों और नावों को रास्ता दिखाने में मदद मिलेगी। ब्रह्मपुत्र पर बनने वाले ये चार रिवर लाइटहाउस पांडु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट में बनाए जाएंगे। ये सभी जगहें नेशनल वाटरवे-2 पर स्थित हैं, जो धुबरी से सदिया तक लगभग आठ सौ इक्यानवे किलोमीटर लंबा जलमार्ग है और असम के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग माना जाता है।
करीब चौरासी करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट असम में नदी परिवहन को एक नई ताकत देगा। हर लाइटहाउस करीब बीस मीटर ऊंचा होगा और पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलेगा। इनका मुख्य उद्देश्य यह होगा कि नदी में चलने वाले जहाजों और माल ढोने वाले बड़े जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके, खासकर रात के समय। अभी तक ब्रह्मपुत्र में रात के समय जहाज चलाना काफी मुश्किल माना जाता था, लेकिन इन लाइटहाउस के बनने के बाद रात में भी सुरक्षित तरीके से नाव और जहाज चल सकेंगे। इससे व्यापार और माल ढुलाई को भी बड़ा फायदा मिलेगा और ब्रह्मपुत्र के जरिए होने वाला कारोबार और तेजी से बढ़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि ये लाइटहाउस सिर्फ नेविगेशन के लिए ही नहीं होंगे, बल्कि इन्हें पर्यटन के नजरिए से भी विकसित किया जाएगा। यहां म्यूजियम, कैफेटेरिया, एम्फीथिएटर, बच्चों के खेलने की जगह और खुले सुंदर गार्डन भी बनाए जाएंगे, ताकि लोग यहां घूमने भी आ सकें। यानी यह प्रोजेक्ट सुरक्षा, पर्यटन और विकास तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। अधिकारियों के मुताबिक ठेके मिलने के बाद करीब चौबीस महीने में इन लाइटहाउस का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो आने वाले समय में ब्रह्मपुत्र नदी पर यह परियोजना असम की पहचान और विकास का एक नया प्रतीक बन सकती है।