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असम में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चाय बागान मजदूरों की समस्या एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। असम में चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर बहुत बड़ी संख्या में हैं और इन्हें राज्य का एक बड़ा वोटर समूह माना जाता है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार चुनाव के नतीजों पर इन मजदूरों का असर पड़ सकता है, खासकर अपर असम के इलाकों में।


अपर असम के कई चाय बागान क्षेत्रों, खासकर डिब्रूगढ़ और आसपास के इलाकों में मजदूरों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या कम मजदूरी और बढ़ती महंगाई है। कई मजदूरों के अनुसार उन्हें रोज करीब ₹250 के आसपास मजदूरी मिलती है, लेकिन आज के समय में इतने पैसे से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। खाने-पीने की चीजें, गैस, कपड़े, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मजदूरी उतनी ही है।
मजदूरों ने यह भी बताया कि कई चाय बागानों में स्वास्थ्य सुविधा अच्छी नहीं है। इलाज के लिए कई बार दूर जाना पड़ता है और समय पर इलाज नहीं मिल पाता। महिला मजदूरों की समस्या और ज्यादा है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता है और घर की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है। लंबे समय तक कठिन काम करने की वजह से कई मजदूरों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं।
असम में चाय बागान इलाकों में मजदूर और उनके परिवार बड़ी संख्या में वोटर हैं। इसलिए चुनाव के समय सभी राजनीतिक पार्टियां इन इलाकों पर खास ध्यान देती हैं। मजदूरी बढ़ाने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने और बुनियादी सुविधाएं सुधारने जैसे मुद्दे हर चुनाव में उठते हैं।
इस बार भी माना जा रहा है कि चाय बागान मजदूरों के मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मजदूरों की समस्याएं, उनकी मांगें और उनका वोट – ये तीनों चीजें इस बार असम चुनाव में बहुत अहम मानी जा रही हैं।

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