आज की सबसे बड़ी खबर सीधे गुवाहाटी से। आज असम इतिहास रचने जा रहा है। सरुसजाई के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आज शाम एक ऐसा सांस्कृतिक आयोजन होने जा रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। ‘बागुरुम्बा डोहू दो हज़ार छब्बीस’ के नाम से बोड़ो समुदाय का पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य एक साथ दस हज़ार से ज्यादा कलाकारों द्वारा पेश किया जाएगा। आज शाम करीब छह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सरुसजाई स्टेडियम पहुंचेंगे और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।मेगा बिहू और झुमोइर के बाद आज बागुरुम्बा के जरिए असम फिर से देश और दुनिया को अपनी सांस्कृतिक ताकत दिखाने जा रहा है।

आज गुवाहाटी की धरती पर असम इतिहास रचने जा रहा है। सरुसजाई के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आज शाम एक ऐसा सांस्कृतिक नज़ारा देखने को मिलेगा, जिसे असम ही नहीं बल्कि पूरा देश और दुनिया याद रखेगी। ‘बागुरुम्बा डोहू दो हज़ार छब्बीस’ नाम से हो रहे इस भव्य कार्यक्रम में बोड़ो समुदाय का पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य एक साथ दस हज़ार से ज़्यादा कलाकारों द्वारा पेश किया जाएगा। यह नृत्य पूरी एकता, तालमेल और अनुशासन के साथ किया जाएगा, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आज शाम करीब छह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सरुसजाई स्टेडियम पहुंचेंगे और इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया है। इस कार्यक्रम में असम के तेईस जिलों की इक्यासी विधानसभा सीटों से कलाकार शामिल हो रहे हैं, जिससे साफ दिखता है कि यह सिर्फ एक नृत्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे असम की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। गुवाहाटी आज असम की पहचान को दुनिया के सामने पेश करने का केंद्र बन गया है।

बागुरुम्बा नृत्य बोड़ो समुदाय की आत्मा से जुड़ा हुआ नृत्य है। यह नृत्य प्रकृति, शांति और जीवन के संतुलन को दर्शाता है। बागुरुम्बा शब्द दो बोड़ो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें ‘बागु’ का मतलब पक्षी और ‘रुम्बा’ का मतलब नृत्य होता है। इसी वजह से इसे ‘डांस ऑफ बर्ड्स’ भी कहा जाता है। इसकी नरम, सुंदर और लहराती हुई मुद्राओं के कारण लोग इसे ‘बटरफ्लाई डांस’ के नाम से भी जानते हैं। आज यही नृत्य एक साथ हज़ारों कलाकारों द्वारा पेश किया जाएगा।
मेगा बिहू और झुमोइर को मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान के बाद अब असम एक और बड़ा सांस्कृतिक अध्याय लिखने जा रहा है। राज्य सरकार और आयोजन से जुड़े संस्थानों का कहना है कि यह कार्यक्रम असम की लोक संस्कृति को विश्व मंच तक ले जाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। हर कलाकार को इस प्रस्तुति के लिए पच्चीस हज़ार रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी, साथ ही जिला स्तर पर दो सर्टिफिकेट भी दिए जाएंगे, ताकि कलाकारों का आत्मविश्वास और बढ़े।
इस कार्यक्रम को तैयार करने वाले मास्टर ट्रेनर्स और कोरियोग्राफर्स को भी सम्मानित किया जाएगा। उन्हें पचास हज़ार रुपये की राशि देकर उनके मेहनत और योगदान को सराहा जाएगा। गुवाहाटी से लेकर असम के दूर-दराज़ इलाकों तक लोगों में इस कार्यक्रम को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। जो लोग सरुसजाई स्टेडियम नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण टेलीविजन पर किया जाएगा। आज सरुसजाई से बोड़ो संस्कृति की आवाज़ देश और दुनिया तक पहुंचेगी, और असम एक बार फिर साबित करेगा कि उसकी सांस्कृतिक विरासत उसकी सबसे बड़ी ताकत है।