Sach – The Reality

Northeast India's First Multilingual Foremost Media Network

Northeast India's First Multilingual Foremost Media Network

असम सरकार ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में कैबिनेट ने छह प्रमुख समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने को मंजूरी दी है। यह फैसला लंबे समय से चल रहे आंदोलनों के बाद आया है और अगर केंद्र सरकार इसकी स्वीकृति देती है तो असम आधिकारिक रूप से एक जनजातीय राज्य बन जाएगा।

असम सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए छह प्रमुख समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन, दिसपुर में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इन समुदायों में ताई अहोम, चूतिया, मोरान, मोतक, कोच-राजबोंगशी और टी ट्राइब्स यानी आदिवासी शामिल हैं।

सरकार ने इस विषय पर बनी मंत्री समूह की रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसे अब असम विधानसभा में रखा जाएगा। इसके बाद यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहाँ से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह समुदाय आधिकारिक रूप से अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता पाएंगे।

यह फैसला उन लंबे समय से चले आ रहे आंदोलनों का परिणाम है, जिनमें इन समुदायों ने अपनी पहचान और अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी। अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो असम को जनजातीय राज्य का दर्जा भी मिलेगा, जो इस क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति में एक बड़ा बदलाव होगा।

इस फैसले के पीछे एक तीन सदस्यीय मंत्री समूह (GoM) की रिपोर्ट है, जिसका नेतृत्व डॉ. रनोज पेगू कर रहे हैं, साथ ही इसमें पिजूष हजारिका और केशब महंता सदस्य हैं। इस समूह ने इन समुदायों को एसटी दर्जा देने की सिफारिश की थी। अब यह प्रस्ताव असम विधानसभा में रखा जाएगा, जहां विधायकों से इस पर चर्चा होगी। इसके बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जो अंतिम मंजूरी देगा।

Wordpress Social Share Plugin powered by Ultimatelysocial