असम में चुनाव का माहौल गर्म है, लेकिन इस बार एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। जहां पहले चुनाव में सैकड़ों नहीं, बल्कि हज़ारों उम्मीदवार मैदान में उतरते थे, वहीं इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। असम विधानसभा चुनाव 2026 में उम्मीदवारों की संख्या पिछले 48 साल में सबसे कम दर्ज की गई है।

Election Commission of India के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार असम की 126 विधानसभा सीटों पर इस बार कुल 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। यह संख्या पिछले कई चुनावों के मुकाबले काफी कम है। इससे पहले 2021 के चुनाव में 946 उम्मीदवार थे, 2016 में 1064, 2011 में 981, 2006 में 997, 2001 में 916, 1996 में 1029, और 1991 में 1657 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जो अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा था। अब यह संख्या आधे से भी कम हो गई है, जिसने राजनीतिक माहौल में नई चर्चा शुरू कर दी है।
उम्मीदवारों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोग अब राजनीति में आने से हिचक रहे हैं। कई लोग राजनीतिक दलों से नाराज़ हैं, क्योंकि बार-बार वही उम्मीदवारों को टिकट दिया जाता है और नए लोगों, खासकर युवाओं को मौका कम मिलता है। इसके अलावा चुनाव लड़ने का खर्च भी बहुत बढ़ गया है, जो आम आदमी के लिए बहुत मुश्किल हो गया है। कई लोग यह भी मानते हैं कि भ्रष्टाचार के आरोप और एक-दूसरे के खिलाफ नकारात्मक प्रचार से भी लोग राजनीति से दूर हो रहे हैं।
चुनाव को लोकतंत्र का त्योहार कहा जाता है, और जब ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं तो इसे जनता की ज्यादा भागीदारी माना जाता है। लेकिन इस बार कम उम्मीदवार होने से यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या राजनीति आम लोगों के लिए मुश्किल होती जा रही है। क्या अब चुनाव लड़ना सिर्फ बड़े नेताओं और पैसे वालों तक सीमित होता जा रहा है? यह भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
जानकारों का कहना है कि अगर नई पीढ़ी राजनीति से दूर होती गई, तो इसका असर आने वाले समय में लोकतंत्र पर भी पड़ सकता है। इसलिए यह सिर्फ उम्मीदवारों की कम संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीति और लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा संकेत भी माना जा रहा है।