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Northeast India's First Multilingual Foremost Media Network

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पूर्वोत्तर के विकास की पटरी पर अब एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ने जा रहा है। 13 मार्च को कोकराझार की धरती से एक ऐसी परियोजना की शुरुआत होने वाली है, जो असम ही नहीं, पूरे पूर्वोत्तर की तस्वीर बदल सकती है। भूटान तक सीधा रेल संपर्क… जी हां, अब सरहदें सिर्फ नक्शे में होंगी, विकास की रफ्तार को कोई नहीं रोक पाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोकराझार पहुंचकर इस रेल लिंक की आधारशिला रखेंगे। माना जा रहा है कि यह परियोजना व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए दरवाजे खोलेगी। बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के लिए भी यह एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।

असम के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। 13 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के कोकराझार में भूटान रेल लिंक परियोजना का शिलान्यास करने जा रहे हैं। यह रेल लाइन कोकराझार को सीधे भूटान से जोड़ेगी। इसे पूर्वोत्तर के लिए एक बड़ा रणनीतिक और विकास से जुड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रीनफील्ड ग्राउंड में कार्यक्रम की तैयारी जोर-शोर से चल रही है और पूरे इलाके में उत्साह का माहौल है।
यह रेल लिंक सिर्फ एक ट्रैक नहीं होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने का नया रास्ता बनेगा। इससे असम और पूरे पूर्वोत्तर के लिए नए अवसर खुलेंगे। भूटान के साथ आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे, बॉर्डर इलाके में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं। केंद्र सरकार लंबे समय से पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दे रही है और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के लिए भी यह खास महत्व रखता है। अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो कोकराझार सीमापार व्यापार का एक अहम गेटवे बन सकता है। इससे इलाके की तस्वीर बदल सकती है और विकास की रफ्तार तेज हो सकती है। कुल मिलाकर, 13 मार्च का दिन असम के विकास के इतिहास में एक अहम तारीख साबित हो सकता है।

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