गुवाहाटी के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और लंबे समय से इंतज़ार की जा रही खुशखबरी सामने आई है। गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी को जोड़ने वाला नया ब्रिज अब हकीकत बनने जा रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऐलान किया है कि 1 मार्च से इस नए ब्रिज पर गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। सालों से जिस पुल का लोग इंतज़ार कर रहे थे, वह अब शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनने वाला है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल ब्रिज पर ट्रैफिक को लेकर अस्थायी व्यवस्था की जाएगी, जो जून तक लागू रहेगी। हालांकि ब्रिज का स्थायी शुरुआती पॉइंट गौरिपुर है, लेकिन अभी वहां ट्रंपेट इंटरचेंज का काम पूरा नहीं हुआ है। इसी वजह से शुरुआत में गाड़ियां आईआईटी गुवाहाटी के रास्ते पुल पर चढ़ेंगी। जैसे ही गौरिपुर में इंटरचेंज का काम पूरा होगा, वहीं से सीधे एंट्री शुरू कर दी जाएगी।
इस पुल पर बसों और ट्रकों को टोल टैक्स देना होगा। इसके पीछे वजह है कि अगर भारी वाहन बिना किसी नियंत्रण के पुल से गुजरने लगे, तो फैंसी बाजार और आसपास के व्यापारिक इलाकों में भारी जाम की स्थिति बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बसों और ट्रकों पर टोल लगाया गया है, जबकि बाकी छोटे वाहनों से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।
एक और खास बात यह है कि अगले पंद्रह दिनों तक यह पुल सिर्फ पैदल लोगों के लिए खुला रहेगा। यानी आम लोग इस पुल पर पैदल चलकर इसे देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं और इस ऐतिहासिक ढांचे का अनुभव ले सकते हैं। इसके बाद एक मार्च से पूरी तरह गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी।
ब्रिज का नाम प्राचीन कामरूप के राजा कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर रखा गया है। इसका औपचारिक उद्घाटन 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं, जिसको लेकर शहर में पहले से ही उत्साह का माहौल है।
करीब 1.24 किलोमीटर लंबे इस पुल को लगभग तीन 3300 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसे असम की सबसे बड़ी और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह पुल न सिर्फ ट्रैफिक का दबाव कम करेगा, बल्कि गुवाहाटी के विकास को भी नई रफ्तार देगा।
कुल मिलाकर, यह पुल गुवाहाटी के लोगों के लिए सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि सालों के इंतज़ार का सपना पूरा होने जैसा है। आने वाले दिनों में यह पुल शहर की पहचान और गर्व का एक बड़ा प्रतीक बनने वाला है।