क्या बुढ़ापे में लालू-राबड़ी पीसेंगे जेल की चक्की? दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब तक जो आरोप राजनीति से प्रेरित बताकर इनकार किया जा रहा था, अदालत ने साफ कर दिया कि मामले में पुख्ता सबूत मौजूद हैं। कोर्ट ने माना कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां नियमों को ताक पर रखकर दी गईं और बदले में जमीन लालू परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई।

राजनीति की दुनिया में आज एक बड़ी सनसनी खड़ी हो गई है। पूर्व रेल मंत्री और जनता के प्रिय नेता लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने ‘लैंड फॉर जॉब स्कैम’ मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि इस मामले में पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जो बताते हैं कि लालू यादव और उनका परिवार सरकारी पदों का इस्तेमाल जमीन लेने के लिए कर रहा था, जैसे कि कोई Criminal Enterprise काम कर रहा हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने नौकरी के बदले जमीन अधिग्रहण में अहम भूमिका निभाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि लालू और उनके परिवार के खिलाफ एक विस्तृत साजिश के संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने माना कि सरकारी नौकरियों में विवेकाधिकार का दुरुपयोग हुआ और बदले में जमीनें ली गईं। अदालत ने यह भी कहा कि यह मानना गलत होगा कि परिवार को इस मामले में डिस्चार्ज किया जाए, क्योंकि सबूत साफ तौर पर सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।
इस मामले में कुल 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। अब अगली प्रक्रिया के तहत ट्रायल शुरू होगा और आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे। सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई, और यह जमीन लालू परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई।
हालांकि, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है, लेकिन अब सवाल यही है—बुढ़ापे में लालू-राबड़ी जेल की चक्की पीसेंगे या बच जाएंगे? जनता की नजरें अब कोर्ट और आने वाले ट्रायल पर टिकी हैं।