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असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस बार कई सारे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमे जुबिन क्षेत्र का जमीन विवाद भी शामिल है । लेकिन इस महत्वपूर्ण सत्र में स्वास्थ्य और सिंचाई मंत्री अशोक सिंघल पूरी तरह गायब रहे। सवाल यही है—जब जुबिन क्षेत्र के जमीन मामले और उनके परिवार से जुड़े सवाल चर्चा में आने वाले थे, अशोक सिंघल कहां थे? क्या सिर्फ पूजा और महायज्ञ ही उनकी अनुपस्थिति की वजह थी, या कुछ और कारण भी थे?

असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 25 से 29 नवंबर तक कई संवेदनशील मुद्दों पर बहस हुई, जिनमें जुबिन गर्ग से जुड़े जमीन विवाद का मामला भी शामिल था। इस दौरान स्वास्थ्य और सिंचाई मंत्री अशोक सिंघल पूरी तरह से गायब रहे। मंत्री आमतौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के पास बैठते हैं, लेकिन इस सत्र में उनका कोई नज़ारा नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि अशोक सिंघल इस दौरान अति रुद्र महायज्ञ में शामिल होने के लिए सिंगरी, धर्मनगर ढेकियाजुली में थे। यह समय इस बात को लेकर भी सवाल खड़ा करता है कि क्या सिर्फ पूजा ही उनकी अनुपस्थिति का कारण था। जबकि मुख्यमंत्री ने दोनों जिम्मेदारियों—सत्र में भाग लेना और पूजा में शामिल होना—को संतुलित किया, अशोक सिंघल ने केवल महायज्ञ को प्राथमिकता दी।

इसके अलावा, मंत्री दो बड़े विभागों के प्रभारी हैं—स्वास्थ्य और सिंचाई। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी में कई सवालों का जवाब किसी और मंत्री को देना पड़ा। यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि अशोक सिंघल और उनका परिवार इस जमीन से जुड़े हैं। अशोक सिंघल पर ज़ूबीन क्षेत्र की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है और इस बीच उनका पूरे सत्र से गायब रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब सवाल यही है—जब जुबिन गर्ग के जमीन मामले जैसे मुद्दे विधानसभा में चर्चा के लिए आए, अशोक सिंघल कहां थे, और क्या सिर्फ भक्ति ही उनकी अनुपस्थिति की वजह थी? विपक्षी नेताओं ने भी उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए और पूछा कि जब जुबिन क्षेत्र के जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मामले चर्चा में थे, अशोक सिंघल कहां थे।

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