जम्मू-कश्मीर के कुलगाम के अखाल इलाके में आतंक के खिलाफ चल रही जंग ने दसवें दिन भी रफ्तार नहीं खोई है। सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच चल रही इस मुठभेड़ में एक और आतंकी को ढेर कर दिया गया है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इलाके में अब भी दो से तीन पाकिस्तानी आतंकी छिपे होने की आशंका है।
यह ऑपरेशन 1 अगस्त को उस समय शुरू हुआ था, जब दक्षिण कश्मीर के अखल के घने जंगलों में आतंकियों की मौजूदगी के पुख्ता इनपुट मिले थे। तब से अब तक पांच से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया है। लेकिन यह सिर्फ आतंकियों के खिलाफ नहीं, बल्कि बहादुरी और बलिदान की कहानी भी है—इस अभियान में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह शहीद हो गए, जबकि दस अन्य जवान घायल हुए हैं।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से सुरक्षाबलों ने अपने एंटी-टेरर ऑपरेशनों को और तेज कर दिया है। अखल ऑपरेशन, ऑपरेशन महादेव के बाद शुरू किया गया, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के उन आतंकियों को श्रीनगर के दाचीगाम इलाके में मार गिराया गया था, जो पहलगाम हमले के जिम्मेदार थे।
इस पूरे अभियान में ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से आतंकियों की निगरानी की जा रही है, जबकि पैरा कमांडो जमीनी स्तर पर उनकी तलाश में जुटे हैं। अखल के घने जंगल और प्राकृतिक गुफाएं आतंकियों को छिपने और बार-बार अपनी जगह बदलने का मौका देती हैं, यही वजह है कि यह ऑपरेशन घाटी के सबसे लंबे आतंक विरोधी अभियानों में से एक बन चुका है। सुरक्षाबलों ने इलाके को पूरी तरह से घेर रखा है, ताकि आतंक का यह अध्याय यहीं खत्म हो सके।