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मिज़ोरम विधानसभा ने मिज़ोरम प्रोहिबिशन ऑफ बेग्गरी बिल, 2025 पारित कर दिया है। इसका मक़सद राज्य में भीख माँगने पर रोक लगाना और प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना है। यह बिल 27 अगस्त को कई घंटों चली बहस के बाद पारित हुआ, जिसमें विपक्षी सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई।

सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री लालरिनपुई ने बताया कि यह कानून सिर्फ़ भीख रोकने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को लंबे समय तक आजीविका और रोजगार के विकल्प देने के लिए भी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मिज़ोरम में अन्य राज्यों की तुलना में भिखारियों की संख्या कम है, जिसका श्रेय सामुदायिक सहयोग, चर्च और एनजीओ को जाता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि सैरांग-सिहमुई रेलहेड शुरू होने के बाद बाहर से लोगों के आने की संभावना बढ़ सकती है।

बिल में राज्य-स्तरीय राहत बोर्ड और रिसीविंग सेंटर्स बनाने का प्रावधान है। इन सेंटरों में भिखारियों को अस्थायी रूप से रखा जाएगा और उसके बाद उन्हें पुनर्वासित किया जाएगा या 24 घंटे के भीतर उनके गृह राज्य भेजा जाएगा।

विपक्षी विधायकों का कहना है कि यह कानून ईसाई मूल्यों को कमजोर कर सकता है और राज्य की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने सख्त रोक के बजाय सामुदायिक भागीदारी पर ज़ोर देने की मांग की।

मुख्यमंत्री लालदूहॉमा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य पुनर्वास है और सरकार चर्चों व एनजीओ के साथ मिलकर मिज़ोरम को भिखारियों से मुक्त रखने का काम करेगी। बिल को 13 विधायकों के समर्थन के बाद मंजूरी दी गई।

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